Movie Review: बैंजो

Movie Review: बैंजो
प्रोड्यूसर : कृषिका लुल्ला
डायरेक्टर : रवि जाधव
स्टार कास्ट : रितेश देशमुख, नरगिस फाकरी
म्यूजिक डायरेक्टर : विशाल शेखर
रेटिंग **


बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख और नरगिस फाखरी की फिल्म ‘बैंजो’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। मराठी फिल्मों में युवा पीढ़ी के निर्देशकों की फेहरिस्त में 'रवि जाधव' का नाम काफी गर्मजोशी से लिया जाता है। वजह साफ है कि उनकी फिल्में न केवल मान-सम्मान पाती रही हैं, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी अब अच्छी कमाई करने लगी हैं। लेकिन क्या ‘बैंजो’ में रवि जाधव के स्टाइल की झलक देखने को मिलती है? क्या जिस नब्ज के कमाल को उन्होंने मराठी फिल्मों में अब तक भुनाया है, उसे वह बॉलीवुड में भी भुना पाएंगे? 'ये क्या' और 'क्यों' जैसे सवाल उनकी इस फिल्म को देख कर उठना लाजिमी हैं, क्योंकि पहली नजर में तो ‘बैंजो’ आंशिक रूप से बस कहीं-कहीं ही असर करती है।

कहानी
यह कहानी न्यूयॉर्क की रहने वाली लड़की क्रिस (नरगिस फाकरी) से शुरू होती है। उसे मुंबई के एक बैंजो बजाने वाले म्यूजिक बैंड की तलाश है, जिसकी सहायता से वो 2 गाने रिकॉर्ड करके न्यूयॉर्क में होने वाले एक म्यूजिक कॉम्पिटिशन में देना चाहती है। जब वो मुंबई आती है तो उसकी मुलाक़ात तरात (रितेश देशमुख) और उसके बैंड के दोस्तों से होती है। लेकिन इसी बीच कुछ ऐसी घटनाएं घटने लगती हैं जिसकी वजह से बैंड के मेम्बर्स के बीच मतभेद होने लगते हैं, और कई सारे मोड़ सामने आते हैं। आखिरकार एक म्यूजिक इवेंट के दौरान ही कहानी को अंजाम मिलता है।

फिल्म का म्यूजिक
फिल्म का संगीत बढ़िया है और अलग तरह के इमोशंस को म्यूजिक के माध्यम से फील भी किया जा सकता है। लेकिन फिल्म की लय को करेक्ट रखने के लिए कुछ गानों को कम भी किया जा सकता था।

फिल्म में रितेश देशमुख ने शानदार अभिनय किया है और एक बैंजो बजाने वाले की भूमिका को बिल्कुल सही तरह से पर्दे पर निभाया है। फिल्म में रितेश का लुक एक रॉक स्टार की तरह से दिखाया गया है।  वैसे बात करें अन्य कलाकारों की तो  रितेश देशमुख को छोड़कर किसी ने भी फिल्म में कोई खास अभिनय नही किया है। नरगिस फाखरी ने थोड़ी सीरियस एक्टिंग करती हुई दिखीं। निर्देशक रवि जाधव जो दिखाना चाहते थे वो सही ढंग से दिखा नहीं सके। फिल्म की कहानी अपने मूल से बिल्कुल भटकती नजर आई। फिल्म शुरुआत में बेहद उबाऊ है लेकिन इंटरवल के बाद थोड़ी लय पकड़ती नजर आती है।

कुल मिला कर यह फिल्म केवल अपने विचार, इरादों, विषय और सोच के कारण उत्सुकता तो पैदा करती है, लेकिन अपने बेहद औसत ट्रीटमेंट और साधारण अभिनय की वजह से निराश भी करती है। फिल्म में बस कुछेक पल और दृश्य ही ऐसे हैं, जहां मजा आता है, दिल करता है कि थोड़ी देर और बैठ जा, अगर म्यूजिकल और अच्छी परफॉमेंस वाली फिल्में आपको पसंद हैं तो इसे मिस मत कीजिएगा।
 



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