Movie Review: बरेली की बर्फी

Movie Review: बरेली की बर्फी
प्रोड्यूसर : नितेश तिवारी, श्रेया जैन, रजत नोनिया
डायरेक्टर : अश्विनी अय्यर तिवारी
स्टार कास्ट : कृति सेनन, राजकुमार राव, आयुष्मान खुराना, पंकज त्रिपाठी और सीमा पहवा
म्यूजिक डायरेक्टर : तनिष्क बागची, वायु, आर्को, समीरा कोप्पिकर
रेटिंग ***


उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि से तैयार हो कर एक और फिल्म दर्शकों का दिल लुभाने के लिए इस शुक्रवार बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हो रही है. जिसका नाम है ‘बरेली की बर्फी’. अभिनेता आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव और कृति सेनन के अभिनय से तैयार इस बर्फी यानी फिल्म में वो क्या वो सभी खूबियां है.  'निल बटे सन्नाटा' (2016) के बाद अश्विनी की यह दूसरी बॉलीवुड फिल्म है, जिसमें उन्होंने एक छोटे शहर की फ्रेंक लड़की की कहानी को पर्दे पर उतारा है. जानते हैं कैसी है फिल्म.

कहानी
यह कहानी है, उत्तर प्रदेश के बरेली के एकता नगर में रहने वाली बिट्टी मिश्रा (कृति सेनन) अपने माता-पिता की अकेली संतान हैं. पिता (पंकज त्रिपाठी) ने उसका पालन-पोषण लड़कों की तरह किया है. इसलिए वो दूसरे लड़कों की तरह शराब और सिगरेट पीती है. लेकिन बिट्टी की मां (सीमा पाहवा) को हर हाल में उसके हाथ पीले करने है. लेकिन उसकी शादी नहीं हो पा रही. इसलिए वो घर छोड़कर जाने लगती है. लेकिन तभी उसके हाथ लगती है एक किताब. जिसका नाम है ‘बरेली की बर्फी’. इस किताब को पढ़ने के बाद बिट्टी की लाइफ बदल जाती है. क्योंकि किताब की पात्र हूबहू उसके जैसी है. जिसके बाद वो किताब के राइटर प्रीतम विद्रोही की तलाश में लग जाती है. उसकी इस तलाश में मदद करने के लिए हाथ बढ़ता है इलाके में प्रिटिंग प्रेस चलाने वाला चिराग दुबे (आयुष्मान खुराना) जो असल में किताब का राइटर है. लेकिन अपने दोस्त प्रीतम विद्रोही (राजकुमार राव) के नाम से किताब छापता है. पहली नजर में बिट्टी से प्यार कर बैठने वाला चिराग अब प्रीतम को ढूंढ कर बिट्टी के आगे पेश करता है. लेकिन प्रीतम के आते ही कैसे इन तीनों की लाइफ में भूचाल आता है. यही है इस बरेली की बर्फी की असली रेसिपी.

फिल्म का म्यूजिक
फिल्म के म्यूजिक पर और काम किया जा सकता था. 'स्वीटी तेरा ड्रामा' के अलावा कोई और सॉन्ग ऐसा नहीं है, जिसे ऑडियंस गुनगुनाते हुए बाहर निकले. बैकग्राउंड स्कोर भी ठीकठाक ही है.

अगर फिल्म में एक्टिंग की बात करें तो,कृति सेनन और आयुष्मान खुराना का अभिनय बेहद ही सहज है. जो रोल के हिसाब से फिट बैठता है. लेकिन इस बर्फी में असली मिठास तब आती है जब राजकुमार राव की एंट्री होती है. भोले-भाले से छोरे से लेकर लीचड़ और रंगबाज लड़के के किरदार में उनका अभिनय देखते ही बनता है. अपने अभिनय से वो दर्शकों को लोटपोट कर देंगे. तो वहीं बिट्टी के माता पिता का किरदार निभानेवाले सीमा पाहवा और पंकज त्रपाठी ने भी अपने रोल के साथ पूरा न्याय किया हैं.

फिल्म का डायरेक्शन अच्छा है. अश्विनी ने छोटे शहर की कहानी को बेहतरीन तरीके से दिखाया है. डायलॉग्स कमाल के हैं, जो खूब ठहाके लगवाते हैं. इसके अलावा , बेहतर लोकेशंस का इस्तेमाल फिल्म में किया गया है. फिल्म का वीक प्वॉइंट है कि कहानी बहुत प्री-डिक्टेबल है. दर्शक आसानी से समझ सकता है कि अगले सीन में क्या होने वाला है. इसे और बेहतर लिखा जा सकता था.

अगर आप हल्की-फुल्की कॉमेडी पसंद करते हैं तो यह फिल्म एक बार देख सकते हैं.



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