जिग्‍नेश मेवाणी इजाजत नहीं मिलने के बावजूद 'युवा हुंकार रैली' के लिए जंतर-मंतर पहुंचे

 जिग्‍नेश मेवाणी इजाजत नहीं मिलने के बावजूद 'युवा हुंकार रैली' के लिए जंतर-मंतर पहुंचे
दिल्ली में रोक के बावजूद जिग्नेश मेवाणी ‘युवा हुंकार रैली’ करने पार्लियामेंट स्ट्रीट पहुंच गए हैं. संसद मार्ग यानी पार्लियामेंट स्ट्रीट में हार्दिक की युवा हुंकार रैली जारी है. रैली में मंच पर नेताओं का मजमा दिखाई दिया जिसमें शहला राशिद, अखिल गोगोई भी थे. रैली के लिए लगाई गई कुर्सियां खाली नजर आईं.


दिल्ली पुलिस ने जिग्नेश को रैली के लिए वैकल्पिक स्थान रामलीला मैदान उपलब्ध कराया गया था लेकिन वह जंतर-मंतर पर रैली के लिए अड़े हुए थे. जिग्नेश ने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है. हम सिर्फ लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना चाह रहे थे. सरकार हमें टारगेट कर रही है. एक चुने हुए प्रतिनिधि को ही नहीं बोलने दिया जा रहा है.

जंतर-मंतर पर रैली को दिल्ली पुलिस ने इजाजत नहीं दी, इसके बावजूद पार्लियामेंट स्ट्रीट इलाके में सुरक्षाबलों का भारी जमावड़ा दिखाई दिया. ऐसा उस बयान को देखते हुए किया गया जिसमें आयोजकों से मंगलवार को 12 बजे संसद मार्ग पर एकत्रित होने की अपील की गई थी.

वहीं, संसद के बाद ऐसे बैनर नजर आए जिनपर जिग्नेश मेवानी को भगोड़ा बताया गया. इन पोस्टर पर जिग्नेश के बारे में कई बातें लिखी गईं. इनमें उन्हें नक्सलियों से सांठगांठ, भड़काऊ भाषण देने और जातीय हिंसा कराने वाले शख्स के तौर पर बताया गया है. इसमें ये भी लिखा हुआ है कि सबकुछ करेंगे लेकिन डिबेट नहीं करेंगे.

दरअसल, एनजीटी ने पिछले साल पांच अक्टूबर को अधिकारियों को जंतर मंतर रोड पर धरना, प्रदर्शन, लोगों के जमा होने, भाषण देने और लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल संबंधी गतिविधियां तत्काल रोकने का आदेश दिया था. आयोजकों में से एक और जेएनयू के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मोहित कुमार पांडेय ने कहा, ‘इस कार्यक्रम को रोकने के लिए बहुत प्रयास किए जा रहे हैं और यहां तक कि कुछ मीडिया घराने गलत सूचना भी फैला रहे हैं कि रैली के लिए इजाजत नहीं दी गई है.’

पांडेय ने पीटीआई को बताया कि दो जनवरी को रैली की घोषणा किए जाने के बाद से, ‘मेवाणी को एक देशद्रोही और शहरी नक्सली बताने वाले पोस्टरों पर बहुत सारा पैसा खर्च किया गया है.’ उन्होंने कहा कि रैली पूर्व निर्धारित समय पर ही होगी.

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