Movie Review : बाबूमोशाय बंदूकबाज

Movie Review : बाबूमोशाय बंदूकबाज
प्रोड्यूसर : कुशन नंदी, किरन श्याम श्रॉफ, अस्मित कुंदर
डायरेक्टर : कुशान नंदी
स्टार कास्ट : नवाजुद्दीन सिद्दीकी, बिदिता बाग, जतिन गोस्वामी और दिव्या दत्ता
म्यूजिक डायरेक्टर : गौरव दगाओंकर, अभिलाष लाकरा, जॉल दुब्बा, देबज्योति मिश्रा
रेटिंग ***


डायरेक्टर कुशान नंदी की फिल्म 'बाबूमोशाय बंदूकबाज' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. कुशान की यह तीसरी बॉलीवुड फिल्म है. कैसी है ये फिल्म. आइए जानते हैं.

कहानी
बाबू एक कॉट्रेक्ट किलर है. किसी को निपटा देना उसके लिए चुटकी का काम है. वो दूसरों के कहने पर कत्ल करता है और बदले में मिलने वाले पैसों से मजे करता है. ये सारे काम वो अपनी मुहं बोली बहन (जीजी) के कहने पर करता है. बाबू की जिंदगी मजे में चल रही होती है. फिर उसकी मुलाकात एक दिन फुलवा से होती है जो उसी गांव में जूते सिलने का काम करती है. बाबू को ताड़ते-ताड़ते उससे प्यार हो जाता है. फिर एक दिन बाबू उसे अपने घर ले आता है. और दोनों एक पति-पत्नी की तरह रहने लगते हैं. सब ठीक-ठाक चल रहा होता है तभी एक दिन बाबू की मुलाकात बांके बिहारी से होती है. जो खुद को बाबू का चेला बताता है. बांके, एक हादसे में बाबू की जान बचाता है. उसके बाद बाबू (नवाजुद्दीन) बांके को भी अपने घर ले आता है. अब फुलवा, बाबू और बांके तीनों साथ रहने लगते हैं. तीनों खूब मस्ती करते हैं. प्यार से रहते हैं. फिर एक हादसा होता है. उस सनसनीखेज हादसे को देखकर आप भी कुर्सी पर जम जाते हैं. हादसा…..सेक्स….प्यार…सब इतना जानलेवा होता है कि एक पल के लिए भी नहीं लगता की आप एक फिल्म देख रहे हैं.

फिल्म का म्यूजिक
फिल्म का म्यूजिक ज्यादा खास नहीं है. हालांकि वो कहानी के साथ-साथ चलता है. इसमें कोई जबरदस्ती का म्यूजिक नहीं है. बैकग्राउंड स्कोर भी ठीक है. कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि जबरदस्ती का कोई गाना ठूंसा गया है.

अगर फिल्म में एक्टिंग की बात करें तो, नवाज की एक्टिंग काफी जबरदस्त है. फिल्म दर फिल्म उनकी एक्टिंग में जो निखार आ रहा है वो यहां देखने को मिला. फिल्म में बिदिता ने भी बढ़िया काम किया है. वहीं दिव्या दत्ता सुमित्रा नाम की मंत्री के रोल में हैं. उनका कैरेक्टर नेगेटिव है जिसे उन्होंने काफी बेहतरीन तरीके से प्ले किया है. मुरली शर्मा और बाकी स्टार्स का काम भी अच्छा है.

फिल्म का डायरेक्शन अच्छा है साथ ही कैमरा वर्क कमाल का है. बेहतर लोकेशंस पर शूट हुई फिल्म में कहीं न कहीं कहानी कमजोर है. फर्स्ट हाफ ठीक है लेकिन सेकंड हाफ में इसे खींचा गया है. जिसे देखकर बोरियत महसूस होती है और लगता है कि ये कब खत्म होगी. साथ ही काफी कैरेक्टर ऐसे हैं जिनके बारे में डिटेलिंग नहीं की गई है. कुछ बोल्ड सीन्स भी जबरदस्ती डाले गए हैं. देखा जाए तो स्क्रीनप्ले और कहानी पर काम किया जा सकता था. कहानी का एंड भी कहीं न कहीं निराश करता है.

अगर आप नवाजुद्दीन के फैन और एडल्ट हैं तो जरूर यह फिल्म देख सकते हैं.



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