Movie Review: शुभ मंगल सावधान

Movie Review: शुभ मंगल सावधान
प्रोड्यूसर : आनंद एल राय, कृषिका लुल्ला
डायरेक्टर : आरएस प्रसन्ना
स्टार कास्ट : आयुषमान खुराना, भूमि पेडनेकर, ब्रिजेंद्र काला, सीमा पाहवा, अंशुल चौहान, अमोल बजाज
म्यूजिक डायरेक्टर : तनिष्क-वायु
रेटिंग ***


डायरेक्टर आरएस प्रसन्ना की फिल्म 'शुभ मंगल सावधान' सिनेमाघरों (शुक्रवार) में रिलीज हो गई है. ये फिल्म मर्दाना कमजोरी विषय पर आधारित है, जिसे फिल्म में हंसी-मजाक के साथ बेहतरीन तरीके से पेश किया गया है. कैसी है ये फिल्म. ये 2013 में आई तमिल फिल्म 'कल्याण समयाल साधम' का ये हिंदी रीमेक है. आइए जानते हैं.

कहानी
फिल्म शुभ मंगल सावधान दिल्ली में रहने वाले मुदित शर्मा (आयुष्मान खुराना) की कहानी है. उसे वहीं की रहने वाली लड़की सुगंधा (भूमि पेडनेकर) से प्यार हो जाता है. दोनों एक दूसरे के करीब आते हैं. और शादी करके हमेशा के लिए एक हो जाने का तय करते हैं. एक दिन सुगंधा के मम्मी-पापा को किसी काम से घर के बाहर जाना पड़ता है. मुदित किसी बहाने से सुगंधा के घर आता है और दोनों शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करते हैं. तभी पता चलता है मुदित को सेक्सुअल प्रॉब्लम है. वो सेक्स नहीं कर पाता. इस बात से वो परेशान हो जाता है, और तमाम उत्तेजक फिल्में देख डालता है और इसी चक्कर में कई बाबाओं के पास भी पैसे लुटा आता है. जैसे ही ये खबर सुगंधा के परिवार में पता चलती है वो इस शादी के खिलाफ हो जाते हैं. लेकिन कहते हैं ना ये जो इश्क है उसका रंग इतनी जल्दी नहीं उतरता. मुदित सुगंधा से किसी भी कीमत पर शादी करना चाहता है. सुगंधा भी उसका साथ देती है लेकिन दोनों के घरवाले और रिश्तेदार हर बात में टांग अड़ाने के लिए काफी होते हैं. दोनों के बीच लड़ाई होती है. नोक-झोंक होती है. फिर क्या होता है ये बताकर हम आपके फिल्म देखने का किरकिरा नहीं करेंगे. 

फिल्म का म्यूजिक
गाने बहुत खास नहीं हैं लेकिन फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाते हैं. अभी तक कोई हिट नहीं हुआ है. यदि फिल्म रिलीज से पहले एक-दो गाने हिट होते तो शायद म्यूजिक और पसंद किया जाता.

अगर फिल्म में एक्टिंग की बात करें तो, मुदित के रोल में आयुष्मान खुराना ने कमाल की एक्टिंग की है. एक दम नैचुरल. बिना किसी लाग-लपेट के. आयुष्मान में ये खास बात है कि वे देसी अंदाज में बहुत ही जल्दी रंग जाते है. फिल्म ‘विक्की डोनर’, ‘दम लगा के हईशा’ इसका एक अच्छा उदाहरण हैं. जहां तक भूमि पेडणेकर की बात है तो उन्हें आप पहली फिल्म से ही देसी अंदाज में देखते आ रहे हैं. भूमि ने एक इंटरव्यू में कहा था, वो चाहती है अच्छी फिल्में करें, खासकर ऐसी फिल्में जो महिलाओं के लिए विशेष संदेश देती हों. ‘दम लगा के हईशा’ ‘टॉयलेटः एक प्रेम कथा’ से ही आप उनके अभिनय का अंदाजा लगा सकते हैं. फिल्म के सभी किरदार अपने अंदाज में पूरी तरह जमे हैं. खासकर बृजेंद्र काला और सीमा पाहवा का किरदार भी गुदगुदाने वाला और काबिले तारीफ है.

फिल्म का डायरेक्शन अच्छा है और डायरेक्टर आरएस प्रसन्ना ने कहीं से भी यह लगने नहीं दिया कि यह उनकी पहली हिंदी फिल्म है. फिल्म की लिखावट दमदार है और एक गंभीर मुद्दे को हंसी-मजाक के साथ पेश किया गया है. संवाद अच्छे और हंसाते हैं. फिल्म का बैकग्राउंड, कैमरा वर्क और साथ ही लोकेशन्स भी अच्छी है. फिल्म को दिल्ली, ऋषिकेश और हरिद्वार में शूट किया गया है. फिल्म का फर्स्ट हाफ बांधकर रखता है, लेकिन सेकंड हाफ कमजोर है. वहीं फिल्म का क्लाइमेक्स भी दमदार नहीं है, जिसे और बेहतर किया जा सकता था.

अगर आपको एक अच्छी कहानी और बेहतर कॉमेडी फिल्म की तलाश है तो यह फिल्म देख सकते हैं.



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