पद्मावतीः सुप्रीम कोर्ट ने बयानबाज नेताओं को दी नसीहत, रोक से इनकार

 पद्मावतीः सुप्रीम कोर्ट ने बयानबाज नेताओं को दी नसीहत, रोक से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने पद्मावती को लेकर लगाई गई पिटीशन मंगलवार को खारिज कर दी। पिटीशन में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों को कानून के मुताबिक काम करना चाहिए और फिल्म पर ऐसा कोई कमेंट नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये मामला अभी सेंसर बोर्ड में लंबित है। ये कमेंट्स सेंसर बोर्ड के मेंबर्स के फैसले पर असर डाल सकते हैं। 


सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म को लेकर बयानों पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा, 'जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों का ऐसे बयान जारी करना अवांछनीय है। इससे सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचेगा और यह कानून के सिद्धांत के भी खिलाफ है।' 

दूसरी तरफ कोर्ट में भंसाली के अधिवक्ता के तौर पर मौजूद हरीश साल्वे ने शीर्ष अदालत को भरोसा दिलाया कि फिल्म को दूसरे देशों में भारत में मंजूरी मिलने से पहले रिलीज नहीं किया जाएगा। उन्होंने दूसरे देशों में 1 दिसंबर को फिल्म को रिलीज करने की खबरों को गलत करार दिया। 

मनोहर लाल शर्मा ने अपनी पिटीशन में कहा था कि फिल्म से आपत्तिजनक सीन हटाए जाएं। साथ ही पिटीशन में डायरेक्टर संजय लीला भंसाली पर केस चलाने की बात भी कही गई है। इससे पहले 10 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने रिलीज पर रोक की पिटीशन को खारिज कर दिया था। शर्मा का दावा है कि फिल्म प्रोड्यूसर ने कोर्ट को गलत फैक्ट्स बताए थे कि गानों और प्रोमो को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC-सेंसर बोर्ड) मंजूरी दे चुका है।

बता दें कि सेंसर बोर्ड ने अभी तक फिल्म को सर्टिफिकेट जारी नहीं किया है। उधर, फिल्ममेकर्स ने रिलीज डेट भी आगे बढ़ा दी है।



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