हाज़मेदार खिचड़ी बन गयी है राष्ट्रीय व्यंजन – राज महाजन

 हाज़मेदार खिचड़ी बन गयी है राष्ट्रीय व्यंजन – राज महाजन
एक वक्त था जब खिचड़ी को पेट दर्द में खाया जाता था. परन्तु जब से देश के प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रीय व्यंजन घोषित किया है तभी से इस पर राजनीति भरसक होने लगी. इन दिनों देश में सभी तरफ खिचड़ी का बोल-बाला नज़र आ रहा है. देखा जाए तो, खिचड़ी इन दिनों राष्ट्रीय विमर्श का सबसे महत्वपूर्ण विषय बन गई है. 


खिचड़ी को हम सरल, सुगम, सुपाच्य और सुस्वाद खाना मानते हैं और सिर्फ इन्हीं कारणों से इसे कई बार मरीजों का खाना भी कह दिया जाता है. लेकिन खिचड़ी सिर्फ खाने वाली चीज़ ही नहीं अपितु इसका प्रयोग विशेषण के तौर पर भी किया जाता है. जब-जब इसे विशेषण के तौर पर प्रयोग में लाया जाता है तब ये व्यंग्य का काम करती है. मसलन- खिचड़ी सरकार, खिचड़ी बाल, खिचड़ी लिखावट, खिचड़ी लेखन और यहां तक कि बीरबल की खिचड़ी. 

खिचड़ी का इस हद तक इस्तेमाल होना बताता है कि खिचड़ी शब्द हमारी भूख और जीभ से होता हुआ हमारे मानस में इतने गहरे तक अपनी पैठ बना चुका है कि अब भोजन से इतर हमारी बहुत सी दूसरी चीज़ों की व्याख्या में भी यह हमारे लिए जरुरी अंग बन गया है.

खिचड़ी को बनाना, खाना और समझना जितना आसान माना जाता है, उसे परिभाषित करना उतना ही मुश्किल है. हमेशा ऐसा नहीं होता, कि दाल-चावल को साथ में मिलाकर बनाया और बन गई खिचड़ी. ऐसा भी कहा जाता है कि अगर आप एक ही मोहल्ले के तीन घरों की खिचड़ी मंगाएं, तो हर एक का स्वाद दूसरे से अलग होगा. 

देश भर में स्थानीय उपलब्धता के आधार पर कहीं इसमें सब्जियां मिला दी जाती हैं, तो कहीं पर फलियां. यहां तक कि आपको इसके मांसाहारी रूप भी देश भर में मिल जाएंगे. खिचड़ी इसीलिए पूरे देश में अपनी जड़ जमा सकी है कि यह सभी को अपनी पसंद, अपनी परंपरा और अपनी स्वाद-संस्कृति को व्यक्त करने के अवसर उपलब्ध कराती है. 

इसके अलावा खिचड़ी ने तो भगवान के घर का रास्ता भी देख लिया है. कहीं-कहीं पर इसे प्रसाद के रूप में भी दिया जाता है. 

खिचड़ी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह एक भोजन है, पकवान नहीं. न उसे शादियों के भोज में परोसा जाता है और न ही वह भव्य दावतों के छप्पन भोग में अपने लिए जगह बना पाती है. ये वे मौके हैं, जिनमें वही व्यंजन पकाए जाते हैं, जिनमें तड़क-भड़क या कुछ दिखावटीपन होता है. 

खिचड़ी अपने आप में सादगी लिए नज़र आती है. जिसकी जरूरत अमूमन हर घर में होती है. ये एक ऐसा भोजन, जिसे अंग्रेजी में कंफर्ट फूड कहते हैं, यानी वह भोजन, जिसे खाने से हमारा पेट ही नहीं भरे, मन भी तृप्त हो जाए.

खिचड़ी जब तक घरों में थी किसी को कोई समस्या नहीं थी. PM मोदी ने इसे भी हाथ लगाकर विपक्षी पार्टियों की आंख की किरकिरी बना दिया है. वाह रे मोदी..खिचड़ी को बना दिया राष्ट्रीय व्यंजन. अब वो दिन दूर नहीं जब राजनीति भोजों में भी खिचड़ी परोसी जायेगी. 



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